MSP kya hai || न्यूनतम समर्थन मूल्य क्या है

MSP क्या होता है?  (What is Minimum support price)

MSP Kya hai – सरकार द्वारा किसानो की फसल के लिए हर साल एक न्यूनतम मूल्य निर्धारित करती है, जिसे न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) कहा जाता है। यह एक तरह से सरकार की तरफ से किसानो को दी जाने वाली सुविधा या गारंटी होती है कि हर हाल में किसान को उसकी फसल के लिए सरकार द्वारा तय दाम ही  मिलेंगे।

अगर साहूकारों या मंडियों में किसान को उसके उपज का MSP या उससे ज्यादा पैसे नहीं मिलते तो सरकार किसानों से उनकी उपज न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP)  पर खरीद लेती है। इससे बाजार में होने वाली फसलों की कीमतों में उतार-चढ़ाव का किसानों पर कोई असर नहीं पड़ता है।

MSP kya hai? MSP Ka Full Form?

MSP का फुल फॉर्म Minimum Support Price है जिसे हिन्दी मे न्यूनतम समर्थन मूल्य के नाम से भी जाना जाता है यह किसानो की एक प्रकार से निर्धारित आय होती है जो किसानों को उनके फसलों पर प्रदान की जाती है चाहे फसल कि उत्पाद कम या ज्यादा हुई हो । इससे किसानों को उनके फसल को बेचने पर किसी प्रकार का नुकसान नहीं होता है। msp kya hai.

MSP की शुरुआत कैसे हुई?

आजादी के बाद से ही भारत मे किसान इस बात को लेकर काफी परेशान थे कि अगर किसी फसल का अत्यधिक पैदावार होता है तो उन्हें उसके अच्छे दाम नहीं मिल पाते थे। और उन फसलों को औने पौने दामो मे बेचना पड़ता था। इस तरह से किसानों को फसल की लागत भी नहीं निकल पाती थी, जिससे वे मायूस होकर आंदोलन करने लगे।

स्व0 लाल बहादुर शास्त्री के कार्यकाल मे शास्त्री जी द्वारा 1 अगस्त, 1964 को एलके झा के नेतृत्व में एक समिति बनी, जिसके जिम्मे अनाजों को एक दाम तय करना था।

लाल बहादुर शास्त्री द्वारा गठित समिति की सिफारिशें 1966-67 लागू होने के बाद देश में पहली बार गेहूं के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का ऐलान किया गया।

इसके बाद से सरकार हर वर्ष फसल की कटाई से पहले फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) घोषित कर देती है। MSP तय होने के बाद सरकार द्वारा स्थानीय सहकारी समितियों और सरकारी एजेंसियों के माध्यम से अनाज खरीदकर फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (FCI) और नेफेड के पास उसका भंडारण करती है। फिर यही सुरक्षित रखा गया अनाज बाद मे सरकारी सस्ते राशन की दुकान (PDS)  के जरिये राशन कार्ड धारक गरीबों तक सस्ते दामों में खाद्यान्न पहुंचाया जाता है।

MSP कौन तय करता है?

देश में MSP तय करने का काम कृषि लागत और मूल्य आयोग (Commission for Agricultural Costs and Prices (CACP) का है। जो भारत सरकार की एक विकेन्द्रित संस्था है। पहले इसका नाम कृषि मूल्य आयोग (Agricultural Prices Commission)  था बाद मे इसका नाम बदलकर कृषि लागत एवं मूल्य आयोग कर दिया गया। यह संस्था अलग-अलग फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का निर्धारण करती है। गन्ने की फसल का MSP सिर्फ गन्ना आयोग ही तय करता है।

MSP मिलने वाले फसल

कृषि लागत और मूल्य आयोग द्वारा  25 वस्तुओं के MSP की सिफारिश करता है, शुरुआत मे सरकार द्वारा सिर्फ गेहूं के लिए MSP तय किया गया था। जिससे किसान बाकी अन्य फसलों को छोड़कर केवल गेहूं की ही फसल उगाने लगे, जिससे अन्य अनाजों का उत्पादन कम हो गया अथवा न के बराबर हो गया। इस स्थिति को देखकर सरकार की तरफ से अन्य फसलों जैसे धान, तिलहन और दलहन पर भी MSP दिया जाने लगा। जिसमें 7 अनाज (धान, गेहूं, मक्का, शर्बत, मोती बाजरा, जौ और रागी) शामिल हैं। 5 प्रकार की दालें (अरहर, उड़द, चना, मूंग, मसूर)। 7 तरह की तिलहन (सरसों, सूरजमुखी, मूंगफली, सोयाबीन, समुद्री घास,  कुसुम, निगर्सिड), और 4 तरह की नगद फसलें (गन्ना, कपास, कच्ची जूट और खोपरा) जैसी फसलो पर MSP दिया जाने लगा।।

न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) तय करने की प्रक्रिया ?

न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) तय करने की प्रकिया काफी पेचीदा और लंबा होता है। न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करने के लिए आयोग द्वारा अलग-अलग क्षेत्रो में फसल की प्रति हेक्टेयर लगाने वाली लागत, खेती के दौरान होने वाले खर्च, सरकारी एजेंसियों की रख रखाव की क्षमता, वैश्विक बाजार में अनाज की होने वाली मांग और उसकी उपलब्धता जैसे मानकों के आंकड़े इकट्ठा करता है। इसके बाद सभी स्टॉकहोल्डरों  और कृषि विशेषज्ञों से सुझाव लिए जाते हैं। अंत में आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति द्वारा इस पर अंतिम फैसला लिया जाता है।

न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) खरीद प्रक्रिया मे होने वाली परेशानी व कारण : MSP Full Form

सरकार द्वारा भले ही 25 से ज्यादा फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) तय किया जाता है, लेकिन आमतौर पर सरकारी स्तर पर खरीद केवल गेहूं और धान की ही हो पाती है। सरकार द्वारा सभी फसलों की खरीद न होना सबसे बड़ा परेशानी है। बाकी अन्य किसान जो धान और गेंहू को छोडकर तिलहन की खेती करते है उन किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का फायदा नहीं मिल पाता है। इसकी वजह यह है कि सरकार द्वारा गेहूं और धान को PDS  प्रणाली के तहत राशन कार्ड धारक गरीबों को देती है इसलिए उसे इसकी जरूरत होती है। बाकी अन्य फसलों की उसे इतने बड़े स्तर पर जरूरत नहीं पड़ती, इसलिए उनकी खरीद नहीं होती है जिससे अन्य किसान अपनी अन्य उपज औने पौने दामो मे बेचने पर मजबूर हो जाते है।

 

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